Monthly Archive: May 2019

Kundali ke dosh upay

कुण्ड़ली मे बनने वाले दस दोष व उपाय

बालारिष्ट दोष जब चंद्रमा लग्न से छठे, आठवें और बारहवें भाव मे, कमज़ोर स्थिति में और क्रुर ग्रहों के प्रभाव मे हो तो बालारिष्ट दोष होता है। चंद्रमा की ये कमज़ोर और पीडित स्थिति बचपन मे आयु के लिए शुभ नही होती है।

Vakri Guru Ka Prabhav

वक्री गुरु का प्रभाव

वक्री ग्रह का नाम सुनकर अक्सर लोग डर जाते हैं। वक्री ग्रह का नाम सुनकर अक्सर लोग डर जाते हैं। ग्रहों के वक्रत्व का अर्थ वे अनिष्ट से लगाते हैं। जन्म कुंडली में यदि...

Kuch Vishist Dhan Yog

कुछ विशिष्ट धन योग

आधुनिक भौतिकतावादी युग में धन की महत्ता इतनी अधिक बढ़ चुकी है कि धनाभाव में हम विलासितापूर्ण जीवन की कल्पना तक नहीं कर सकते, विलासित जीवन जीना तो बहुत दूर की बात है।

Das Pavitra Pakshi

दस पवित्र पक्षी और उनका रहस्य

जब कोई व्यक्ति सिद्ध हो जाता है तो उसे कहते हैं कि इसने हंस पद प्राप्त कर लिया और जब कोई समाधिस्थ हो जाता है, तो कहते हैं कि वह परमहंस हो गया। परमहंस सबसे बड़ा पद माना गया है।

Janmke paye ke bareme janana

जन्म के पाया के बारे में जानना

पाया का विचार दो प्रकार से किया जाता है नक्षत्र से तथा चंद्रमा से जन्म के पाया के बारे में जानना – पाया का विचार दो प्रकार से किया जाता है नक्षत्र से तथा...

Ravi Pushya Yog

रवि पुष्य योग

रवि पुष्य योग समस्त शुभ और मांगलिक कार्यों के शुभारंभ के लिए उत्तम माना गया है। यदि ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल हो अथवा कोई अच्छा मुहूर्त नहीं भी हो, ऐसी स्थिति में भी रवि पुष्य योग सभी कार्यों के लिए परम लाभकारी होता है लेकिन विवाह को छोड़कर।

Shanimaharaj

शनिमहाराजजी

आज हम आपको बतायेगें कि शनि महाराज को प्रसन्न करने के लिये क्या करें और क्या न करें? शनिवार के दिन यह दस चीजें ना लाएं घर में!!!!! किसी भी वस्तु के उपयोग या...

Kalsarpdosh Atal Satya

कालसर्प योग एक अटल सत्य

कालसर्प योग एक अटल सत्य
कालसर्प योग जो जातक के पूर्व जन्म के किसी जघन्य अपराध के दंड या शाप के फलस्वरूप कुंडली में होता है।

ShaniChandraMaa

शनि चन्द्रमाँ का योग

शनि चन्द्रमाँ का योग मानसिक तनाव देता है। शनि चन्द्रमाँ का योग मानसिक तनाव और मन के अस्थिर रहने की समस्या देकर एकाग्रता की कमी करता है। और ऐसा व्यक्ति अपने कार्यों को पैंडिंग...

Budh Aaditya Yog

बुध-आदित्य – योग

चेतना के बिगैर – सब कुछ व्यर्थ है । चेतना का होना अथवा चैतन्य होना अथवा सजग होना – स्वयं का विकास है । लेकिन – आजकल आर्थिक विकास मुख्य मुद्दा है ।