बुध-आदित्य – योग

•• चेतना के बिगैर – सब कुछ व्यर्थ है । चेतना का होना अथवा चैतन्य होना अथवा सजग होना – स्वयं का विकास है । लेकिन – आजकल आर्थिक विकास मुख्य मुद्दा है । लोग धन अर्जित करने के चक्कर मे शरीर गवां देते है और फिर ढलती उम्र के साथ दवाओं पर निर्भर हो जाते हैं । ये वो स्थिति है – जब हम अपने शरीर को बाहरी केमिकल से नियन्त्रित करने का प्रयास करते है । जबकि – हमारा शरीर खुद ही एक केमिकल फैक्ट्री है । अगर – आपकी चेतना जागृत हो, आप चैतन्य हो अथवा आप सजग हो – तो आपका शरीर आपके लिये आवश्यक केमिकल खुद ही बनाता है ।

अगर – आपकी कुण्डली में सूर्य बलवान है तो आपमे भरपुर चेतना है । इस चेतना के शारीरिक उपयोग के लिये आपका बुध भी बलवान होना चाहिये ताकि आपकी चेतना सर्वव्यापी हो सके । बलवान बुध – आपकी चेतना को अवचेतन मस्तिष्क के उन हिस्सों से मिलाता है – जिससे आप भौतिक जगत से दूर के तत्वों को महसूस करते हैं । आप ध्यानमग्न होना सीखते हैं, आप चतुर्थ आयाम को महसूस करते है और आपकी आत्मा प्रसन्न होती है ।

फलस्वरूप शरीर के आवश्यक केमिकल खुद ही बनते है और आप बीमार नही होते हैं । बुध – चेतना के नज़दीक रहने वाला वो वाहक है – जो चेतना को शारीरिक लाभ में बदलता है और उसे उचित स्थान पर पहुँचाता है । इसलिये – बलवान सूर्य और बलवान बुध से बनने वाला बुध-आदित्य योग सर्वश्रेष्ठ है ।

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