Category: नक्षत्र

AkashVani Nakshatra

श्रवण चरण फल

श्रवण चरण नक्षत्र प्रथम चरण इसका स्वामी मंगल है। इसमे शनि, चन्द्र, मंगल ♄ ☾ ♂ का प्रभाव है। मकर 10।00 से 13।20 अंश। नवमांश मेष। यह आकांक्षा, जीवनवृत्ति, सूत्रपात का द्योतक है। जातक...

AkashVani Nakshatra

उत्तराषाढ़ा चरण फल

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रथम चरण इसका स्वामी गुरु है। इसमे गुरु, सूर्य, गुरु का प्रभाव है। धनु 266।00 से 270।00 अंश। नवमांश धनु। यह संचार, विश्वास, खर्चीलेपन का द्योतक है। जातक सौम्य, गौर वर्ण, अश्व...

AkashVani Nakshatra

पूर्वाषाढ़ा चरण फल

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र प्रथम चरण इसका स्वामी सूर्य है। इसमे गुरु, शुक्र, सूर्य का प्रभाव है। धनु 253।20 से 256।40 अंश। नवमांश सिंह। यह अभिमान, विश्वास, आध्यात्मिकता का द्योतक है। जातक सिंह समान देह वाला,...

AkashVani Nakshatra

मूल चरण फल

नक्षत्र मूल नक्षत्र प्रथम चरण इसका स्वामी मंगल है। इसमे गुरु, केतु, मंगल का प्रभाव है। धनु 240।00 से 243।20 अंश। नवमांश मेष। यह जिज्ञासा, सकारात्मकता, आध्यात्म का द्योतक है। जातक सुन्दर दांत व...

Shani Saturn | Shani Dev | Shani Maharaj

द्वादश भावों मे शनि का फल

जन्म कुंडली के बारह भावों मे जन्म के समय शनि अपनी गति जन्म कुंडली के बारह भावों मे जन्म के समय शनि अपनी गति और जातक को दिये जाने वाले फ़लों के प्रति भावानुसार...

Ravi Pushya Yog

रवि पुष्य योग

रवि पुष्य योग समस्त शुभ और मांगलिक कार्यों के शुभारंभ के लिए उत्तम माना गया है। यदि ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल हो अथवा कोई अच्छा मुहूर्त नहीं भी हो, ऐसी स्थिति में भी रवि पुष्य योग सभी कार्यों के लिए परम लाभकारी होता है लेकिन विवाह को छोड़कर।