काल सर्प दोष का सरल एवं सस्ता उपाय

AkashVani Astrology Post

काल सर्प दोष

कुण्डली में राहू – केतू के मध्य सभी ग्रह आ जाते हैं तो यह दोष बन ता है।

उपाय

अमावस्या के दिन तीन जटा वाले नारियल, एक किलो कच्चे कोयला ले जाकर बहते पानी में डाले। पहले एक – एक कर कर नारियल डाले, फिर एक साथ सभी कोयले डाल दें। फिर अपने घर वापस आ जायI ऐसा तीन अमावस्या को करे.

पितृ दोष के उपाय एवं परिभाषा

पितृ दोष होने पर जन्म कुंडली में सूर्य – राहू – केतू में परस्पर संबंध हैं।

पितृ दोष कि परिभाषा

कुण्डली इस बात को प्रमाणित करती है कि सूर्य जब शनि के प्रभाव में होता है।

ऐसा जातक पितर दोष से पीड़ित होता है, जब शनि के साथ राहु भी सूर्य को पीड़ित करता है तो समझ लेना चाहिए जातक पितर दोष से पीड़ित हैं, यह निश्चित है कि।

ऐसा कोई भी परिवार नहीं है जिसमे किसी की मृत्यु नहीं हुईं हो।

ऐसा पूर्वज, जो स्वयं पीड़ित हो और पितर योनि से मुक्ति चाहता हो, वह पितर दूसित हो जाता है. और यही अपने वंसज को परेशान करता है. क्योंकि वह स्वयं परेशान हैंI यही पितर दोष कहलाता है।

पितृ दोष के उपाय

अमावस्या के दिन सवा गज सफेद कपड़ा ले. उसे चौकी पर बिछा दे।
उसके एक कोने सवा पांच रुपए तथा कुछ चावल रख कर बांध दे. और एक जटा बाला नारियल लेकर पित्रो का ध्यान करते हुए उस कपड़े पर रखे।
तथा नारियल को भी बांध कर गांठ लगा दे।

ऐसा करने के पश्चात नारियल को उठाकर किसी सुरक्षित स्थान पर रख दे. और मिठाई बच्चों को खिला दे. संभव हो तो खाना खाने के पहले थोड़ा अन्न निकल कर अलग रख दे. बाद में गाय को खिला दे।

इसके अलावा माघ – बैसाख – भाद्रपद माह की अमावस्या को पितरों में निमित्त दान करें। इसके अलावे और भी तावे के लोटे के जल में श्वेतआर्के के पुष्प डाल कर नित्य सूर्य को अर्ध्य दे. और सूर्य मंत्रों का जाप करे.

और पितरों के निमित्त घर में दीपक – अगरबत्ती जलाएँ

सूचना

जब कोई गृहस्थ किसी विद्वान कर्‍म काण्डी से पितरों के हेतु कुछ जप, दान अथवा अनुष्ठान कराता है, तब सभी देवी – देवता प्रसन्न होते हैं।

और संसार में कार्यरत देव पितर, ऋषि पितर, विश्व देव, अग्नि स्वांत, आदि के श्राद्ध तत्व को शुध्द ढंग से नाम, वंश, गोत्र, आदि का उच्चारण करने पर उपयुक्त पितर तक पहुंचाने में सहयोग करते हैं, उनके सहयोग से पितर स्वय आकर अपना – अपना अंश प्राप्त करते हैं।

जय श्री कृष्ण

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