पूर्वाषाढ़ा चरण फल

AkashVani Nakshatra

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र

प्रथम चरण

इसका स्वामी सूर्य है। इसमे गुरु, शुक्र, सूर्य का प्रभाव है। धनु 253।20 से 256।40 अंश। नवमांश सिंह। यह अभिमान, विश्वास, आध्यात्मिकता का द्योतक है। जातक सिंह समान देह वाला, बड़ा मुख, नेत्र, कंठ वाला, बड़ी भोंहे, मोटे कंधे, घने रोम, विध्वंसकारी, अहंकारी दृढ़ बुद्धि होता है।

इस पाद मे जातक बहुत बुद्धिमान, विश्वासी, समाज में प्रशंसनीय छवि वाला, प्रतिष्ठित नैतिक कुल का, आर्थिक स्तर से ज़्यादा स्वाभिमानी, चरित्रवान होता है।

द्वितीय चरण

इसका स्वामी बुध है। इसमे गुरु, शुक्र, बुध का प्रभाव है। धनु 256।40 से 260।00 अंश। नवमांश कन्या। यह संचार, अध्यव्यसाय, भौतिकवाद का द्योतक है। जातक कोमल व गोरा, चौड़े करुणा युक्त नेत्र, दीर्घ ललाट, चौड़ा मुख, सुआचरणी, कवि, त्यक्त, मंद भाग्य, विद्वान कथाकार होता है।

जातक कर्मठ, वैवाहिक जीवन मे सफल, बुद्धिमान होता है। इसका उध्येश्य व्यापार मे निरन्तर उन्नति और विकास, उचाई प्राप्त करना होता है। प्रतिस्पर्धी इसकी गुणवत्ता सेवा, और बुद्धि के सामने घुटने टेक देता है।

तृतीय चरण

इसका स्वामी शुक्र है। इसमे गुरु, शुक्र, शुक्र का प्रभाव है। धनु 260।00 से 263।20 अंश। नवमांश तुला। यह विलासता, प्रेम, साझेदारी, भौतिकता का द्योतक है। जातक श्याम वर्ण, ऊँचा सिर, कोमल वाणी, संग्रही, गुप्त योजना वाला, काम निकलने मे निपुण, ज्येष्ठ औरतो से कोमल सम्बन्ध रखने वाला होता है।

जातक सफल व्यापारी, सुखद वैवाहिक जीवन बिना मेहनत के प्रचुर धन पाने वाला होता है।

चतुर्थ चरण

इसका स्वामी मंगल है। इसमे गुरु, शुक्र, मंगल का प्रभाव है। धनु 263।20 से 266।40 अंश। नवमांश वृश्चिक। यह गोपनीयता, रहस्य, मनोवाद, अभिमान, उददण्डता, भौतिक पराङ्मुखता का घोतक है। जातक का नाक का अग्र भाग चपटा, चौड़ा सिर, सामान्य कद, व्याकुल नेत्र, शत्रुवान, प्रलापी, उद्विग्न, व्यग्र, झगड़ालु होता है।

जातक गुप्त स्वभाव वाला, आलोकिक विषयो में रुचिवान, अंतर्राष्ट्रीय मामलों का विशेषज्ञ, शत्रु और प्रतिस्पर्धी युक्त, बच्चो की देख-रेख करने वाले N G O को पर्याप्त धन देने वाला होते है। ये अपने खुद की तारीफ करने वाले (अपने मियाँ मिट्ठू) होते है।

यदि शुक्र बलि हो, तो जातक का झुकाव कला और सौन्दर्य के प्रति अधिक होता है।

आचार्यो ने चरण फल सूत्र रूप मे कहा है परन्तु अंतर बहुत है।

यवनाचार्य : पूर्वाषाढ़ा प्रथम चरण मे श्रेष्ठ व्यक्ति, द्वितीय चरण मे राजा,, तृतीय चरण मे परिवादी और चतुर्थ चरण में धनवान होता है।

मानसागराचार्य : पूर्वाषाढ़ा प्रथम चरण मे क्रोधी, द्वितीय चरण मे पुत्रवान, तृतीय चरण मे कामी, चतुर्थ चरण मे धनी होता है।

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