श्रवण चरण फल

AkashVani Nakshatra

श्रवण चरण नक्षत्र

प्रथम चरण

इसका स्वामी मंगल है। इसमे शनि, चन्द्र, मंगल ♄ ☾ ♂ का प्रभाव है। मकर 10।00 से 13।20 अंश। नवमांश मेष। यह आकांक्षा, जीवनवृत्ति, सूत्रपात का द्योतक है।

जातक गोल नेत्र, चौड़ा ललाट, लम्बी भुजा, दुर्बल अंग, छिदे दांत, तोतला होता है।

जातक केन्द्रीभूत, महत्वाकांक्षी, आत्मश्लाधी, बुरे मित्र वाला, विपरीत लिंग के मित्र को शीघ्र बदलने वाला होता है।

जातक दयालु, सत्यधर्म पर चलने वाला, प्रतिदिन मंदिर जाने वाला, सामाजिक उत्सव प्रिय, परिवार प्रेमी, विपरीत लिंग के साथ मौज-मस्ती करने वाला, बहु संतति , फूल प्रेमी, अच्छी वेश भूषा वाला होता है। इसके गुप्तांग या प्रजनन अंग की शल्य चिकित्सा हो सकती है।

द्वितीय चरण

इसका स्वामी शुक्र है। इसमे शनि, चंद्र, शुक्र का प्रभाव है। मकर 13।20 से 16।4 0 अंश। नवमांश वृषभ। यह कूटनीति, नम्रता, युक्ति, अध्यव्यसाय, या दीर्घ प्रयत्न का द्योतक है।

जातक ऊँची नाक, बड़ा पेट, श्याम वर्ण, गोल भुजा व जाँघे वाला, सुन्दर, सुवंशी, काम पूरा कर ही चेन लेने वाला, दृढ़ निश्चयी, विद्वान, कूटनीतिज्ञ, मधुर भाषी, पैसो की टकसाल मे कलाविद होता है।

तृतीय चरण

इसका स्वामी बुध है। इसमे शनि, चन्द्र, बुध का प्रभाव है। मकर 16।40 से 20।0 0 अंश। नवमांश मिथुन। यह लचीलापन, संचार, चालाकी का द्योतक है।

जातक कोमल कांति, पतले होंठ, बड़ी दाढ़ी, चौड़ा ललाट, कामी, सुवक्ता, सुन्दर वेशी होता है।

जातक मे सभी गुण-दोष होते है। यह अच्छा श्रोता तथा संचार वाहक, शास्त्र कथाओ का श्रोता, ज्ञान की उच्च शाखा का विशेषज्ञ, अधिक पुत्र वाला होता है।

चतुर्थ चरण

इसका स्वामी चन्द्रमा है। इसमे शनि, चन्द्र, चन्द्र का प्रभाव है। मकर 20।00 से 23।20 अंश। नवमांश कर्क। यह चित्त मे भावना की उत्पत्ति या ग्राह्यता, भीड़, उन्मुखता, सहानुभूति का द्योतक है।

जातक काला रंग, बड़ा शरीर, कोमल हाथ व पैर, कठोर, सुभाषी, बुद्धिमान, सुशील, सदाचारी, कुछ भावुक, समूह प्रेमी, जन समूह मे संतुलन बनाये रखने वाला, वार्तालाप और गपशप करने वाला, पुरोहित और पूजारी का सम्मान करने वाला, अहंकारी होता है। 20 वा वर्ष धातक होता है।

आचार्यो ने चरण फल सूत्र रूप में कहा है लेकिन अंतर बहुत है।

यवनाचार्य : श्रवण के पहले पाद मे कल्याणकारी कार्यो के लिए हठ करने वाला, दूसरे पाद मे अच्छे गुणों से युक्त, तीसरे पाद मे धनवान, चौथे पाद मे उत्तम स्त्री वाला होता है।

मानसागराचार्य : पहले चरण मे पर स्त्री गामी, दूसरे चरण मे देवांश, तीसरे चरण मे पुत्रवान, चतुर्थ चरण मे उत्तम होता है।

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