Aakash Vaani Blog

AkashVani Nakshatra

उत्तराषाढ़ा चरण फल

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रथम चरण इसका स्वामी गुरु है। इसमे गुरु, सूर्य, गुरु का प्रभाव है। धनु 266।00 से 270।00 अंश। नवमांश धनु। यह संचार, विश्वास, खर्चीलेपन का द्योतक है। जातक सौम्य, गौर वर्ण, अश्व...

AkashVani Nakshatra

पूर्वाषाढ़ा चरण फल

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र प्रथम चरण इसका स्वामी सूर्य है। इसमे गुरु, शुक्र, सूर्य का प्रभाव है। धनु 253।20 से 256।40 अंश। नवमांश सिंह। यह अभिमान, विश्वास, आध्यात्मिकता का द्योतक है। जातक सिंह समान देह वाला,...

AkashVani Nakshatra

मूल चरण फल

नक्षत्र मूल नक्षत्र प्रथम चरण इसका स्वामी मंगल है। इसमे गुरु, केतु, मंगल का प्रभाव है। धनु 240।00 से 243।20 अंश। नवमांश मेष। यह जिज्ञासा, सकारात्मकता, आध्यात्म का द्योतक है। जातक सुन्दर दांत व...

AkashVani Vastu Shastra

भगवान हनुमान की तस्वीर

हनुमान की तस्वीरों से जुड़ी विशेष बाते भगवान हनुमान की तस्वीरों से जुड़ी बाते लेकिन अब आप अपनी मनोकामना के लिए उसके मुताबिक हनुमान जी की तस्वीर की पूजा करके उन्हें प्रसन्न कर सकते...

AkashVani Astrology Post

10 सरल वास्तु टिप्स

सफलता चाहिए तो अपनाएं ये छोटे-छोटे 10 सरल वास्तु टिप्स जीवन को खुशहाल बनाएंगे ये 10 वास्तु उपाय वास्तु विज्ञान में हमारे पूर्वजों ने अपने दिव्य ज्ञान से ऐसे अनेक तथ्यों को शामिल किया...

AkashVani Astrology Post

16 सिद्धियां

16 सिद्धियां सुना तो है पर होती क्या हैं? वाक सिद्धि जो भी वचन बोले जाए वे व्यवहार में पूर्ण हो, वह वचन कभी व्यर्थ न जाये, प्रत्येक शब्द का महत्वपूर्ण अर्थ हो, वाक्...

AkashVani Astrology Post

ग्रह दशा

कुछ ऐसे संकेतों के बारे में जानें जो यदि आपमें प्रकट हो रहे हैं तो समझें आपकी ग्रह दशा बिगड़ रही है पैर हिलाना यदि अचानक पैर हिलाने की आदत बढ़ रही है या...

Rahu

राहु और बिजली

कड़कती बिजली के रूप में कुपित राहु साधारण रातों में चलने वाली हवा में होने वाली साएं-साएं – राहु है । लेकिन हवा प्रबल हो जाये और तूफान बन जाये तो उसमें कड़कती बिजली...

Shani Saturn

शनि की साढे साती

ज्योतिष के अनुसार शनि की साढेसाती की मान्यतायें तीन प्रकार से होती हैं। पहली लगन से दूसरी चन्द्र लगन या राशि से और तीसरी सूर्य लगन से, उत्तर भारत में चन्द्र लगन से शनि...

AkashVani Astrology Post

कर्म, भाग्य और ज्योतिष

जीवन में पुरूषार्थ और भाग्य दोनों का ही अलग-अलग महत्व है। ये ठीक है कि पुरूषार्थ की भूमिका भाग्य से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है लेकिन इससे भाग्य का महत्व किसी भी तरह से कम...