प्रेम व प्रेमविवाह के योग

आज के समय मे लडका लडकी की आपसी पसदं से विवाह होना आम बात है

आज के समय मे लडका लडकी की आपसी पसदं से विवाह होना आम बात है बच्चो की खुशी के लिए माँबाप भी मना नही करते लेकिन हर विवाह चाहे लव हो अच्छे से चल जाए ऐ बहुत बडी बात है।

बदलते कल्चर ने सोच समझ बदल दी न रीती रही न रिवाज न पुराने संस्कार जिससे आपसी समझ और रिश्तो की गहराई खतम होती जा रही हमारे पास अधिकतर केस तलाक के होते है जिनमे 4-8 साल साथ रहे दमपत्तिओ के होते है बडा दुखः भी होता है ।

खैर प्रेम विवाह हो या अतिरिक्त विवाह जो या तो मजबूरी मे हो या कडवाहट पहली शादी से कारण कई हो सकते है।

इनमे अधिकतर शाररिक सबंध कायम करने के बाद विवाह योग बनाते है जो सामाजिक रितियो से हटकर हो ।

आज के समय मे प्रेम होना आम बात है उसके लिए समाज की प्रवाह से हटकर माता पिता से अलग होकर विवाह करना ऐ भी सामान्य बात है चलो विवाह किया तो किया पर उसके बाद भी सुख नही कुछ समय साथ रहने पर बिखराव हो जाता तब भी दुखः स्वयः के साथ माता पिता को भी होता है ।

सबसे दुखःपूर्ण शादी व लव की स्थती राहू और चद्र की दशा अर्तदशा मे होती है दोनो ही मन और विचार को दूषित होने पर जातक व जातिका को मर्यादा और समाज से लडकर अलग फैसले लेकर खुद की सोच को कायम करने के लिए उकसाती है ।

राहू की दशा अधिकतर लोगो को बरबाद ही करती है खासतर दामपत्य जीवन को यदि शुक्र के साथ युति यदि वृश्चिक राशी मे या दृष्टी सबंध आपस मे हो या मगंल राहू और शुक्र युतिवत हो तो कामुकता बढाके मानसिक रोग बढा देता है।

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प्रेम व प्रेमविवाह के योग

उसको कामवाषना के सिवा कुछ नही दिखता शनि का व गुरू का हस्तक्षेप उसको फिर शादी के लिए मजबूर करता है चाहे समाज के डराने पर या कानून से ।

इन सब कामो को करने के लिए साहस यानी मगंल का साथ खराब राहू को मिलना भी है । सुर्य शनि की युति से मगंल और शुक्र खराब होने लगते है खासतर शुक्र यानी पत्नी बिमार रहने लगती है ठीक यदि सुर्य की महादशा हो और सुर्य शुक्र की युति हो ऐसा जातक व जातिका दिन के समय शादी से पहले सबंध कायम करता है तो उसके भाग्य से शादी के रास्ते बंद हो जाते है और पिता चितां से रोग ग्रसत हो जाता है कितना पढा लिखा हो सुदंर हो रास्ता नही बनता व उम्र बढती रहती है फिरभी अहंकार भरा रहकर सबको नकारता रहेगा ।

शनि राहू की युति त्रिक भाव मे नीच की हो और यदि महिला की कुडंली मे हो तो शादी का सुख नही मिलेगा चाहे पति अच्छा वो स्वयः लडकर झूठ बोल कर इल्जाम लगाकर माऐके बैठ जाऐगी पर कुछ समय बाद वंहा भी नकारी जाती है तब अहसास होता है कर्म का शनि राहू के उपाय से दूबारा सुख मिल सकता है ।

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प्रेम व प्रेमविवाह के योग

राहू की दशा मे काम व रिश्ते दोनो बिगडते है कहने का मतलब अपना पराया कौन है कौन था राहू की दशा बता देती है । इसदशा मे शादी व प्रेम सबंध अधिक बनते है पर सही गलत का फैसला नही समझ आता अपनी गलती नही दिखती बस भूत लव व शादी का दिखता है ।

प्रेम होने और शादी होने पर सप्तम व पचंम भाव जागृत हो जाते है यदि पाप ग्रह इन घरो मे हो यदि स्वयः राहू हो और नीच के साथ दशागत हो तो शादी पाचं व दस दिन मे पता लगने लगता है की उसने किया क्या है पति व उसके घर का स्वभाव का असर आने लगता है या पत्नी के रगं ढगं ।

राहू तब अपने आप छिप जाता है फिर जो होगा उसको चुप रहकर देखने लगेगा यही काम है । ठीक चद्र भी कुछ दिन बाद मानसिकता बदलकर झगडे छोटी छोटी बात शुरू होकर आंखो से आंसू के रूप मे बहने लगता है ।

चलिए एक नजर लव मैरिज जो सबंध कायम होने के बाद होती हो ऐसे योग बताते है

प्रेम विवाह, गंधर्व विवाह आदि में महत्वपूर्ण योगदान होता है। मित्रता या जीवन साथी के चुनाव तथा प्रेम विवाह में चंद्रमा,मंगल तथा शुक्र की अति महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रेम-विवाह में इन तीनों ग्रहों की अहम भूमिका होती है।

चंद्रमा मन, मंगल साहस और शुक्र आकर्षण से युवक-युवतियों की मित्रता में छिपे रहस्य को जाना जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र के विभिन्न फलित ग्रंथों तथा व्यावहारिक अनुभव से प्रेम-विवाह के कुछ योग इस प्रकार कहे जा सकते है।

  1. यदि सप्तम भाव का स्वामी तथा तृतीय भाव के स्वामी मिलते हैं तो प्रेम-विवाह का योग बनता है।
  2. शुक्र और मंगल परस्पर भाव परिवर्तन का योग निर्मित करते हैं तथा इनका संबंध बृहस्पति से होता है तो जातक पहले शारीरिक संबंध कायम करता है तथा उसके बाद विवाह करता है।
  3. शुक्र एवं मंगल का संयोग लग्न या सप्तम भाव से हो तथा चंद्रमा का इस पर प्रभाव पड़ता है तो ऐसा जातक प्रेम-विवाह करता है। इसके कारण शारीरिक संयोग भी विवाह का कारण बन सकता है।
  4. कुंडली में बृहस्पति और सप्तम भाव के स्वामी के सबल होने से प्रेम विवाह सफल होते है। बृहस्पति की कृपा से वैवाहिक जीवन समृद्ध और स्थिर होता है। सप्तम भाव का सबल स्वामी वैवाहिक जीवन को सफलता प्रदान करता है।
  5. शनि और बृहस्पति के गोचर भाव से प्रेम-विवाह की अवधि का पता चलता है। गोचर में जब शनि और बृहस्पति का संबंध सप्तम भाव के स्वामी से होता है तो विवाह अवश्यंभावी हो जाता है।

Source: Astrology Group

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