शनि चन्द्रमाँ का योग

शनि चन्द्रमाँ का योग मानसिक तनाव और मन के अस्थिर रहने की समस्या देकर एकाग्रता की कमी करता है। और ऐसा व्यक्ति अपने कार्यों को पैंडिंग बहुत रखता है और केयर्लैस स्वाभाव का होता है।

शनि यदि नीच राशि में हो या कुंडली के छटे आठवें भाव में हो तो कमर दर्द और घुटनो के दर्द की समस्या देता है।

कुंडली में शनि का बलि अर्थात मजबूत होना व्यक्ति को प्राचीन वस्तुओं के व्यवसाय से भी लाभ कराता है।

गोचर में शनि का हमारी राशि से आठवीं राशि में आना स्वास्थ में समस्याएं देता है।

जिन लोगो की कुंडली में शनि में कमजोर या पीड़ित हो उन्हें लोहा, स्टील, कांच, पेट्रोल और केमिकल प्रोडक्ट से जुड़े व्यवसाय नहीं करने चाहिये।

जो व्यक्ति श्री कृष्णा, शिव और हनुमान जी की पूजा करते हैं कर्म प्रधान होते हैं माता–पिता, बुजुर्गों और मजदूरों का सम्मान करते हैं उन पर शनि का दुष्प्रभाव नगण्य होता है।

उपाय

शनिवार की रात में रक्त चंदन से अनार की कलम से ‘ऊं हृीं’ को भोजपत्र पर लिखकर नित्य पूजा करने से विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होती है। यह टोटका पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए सबसे फायदेमंद होता है।

शनि को मनाने के लिए हनुमान जी की पूजा करना भी अच्छा उपाय है। प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान जी के दर्शन और उनकी भक्ति करने से शनि के सभी दोष समाप्त होते हैं। ऐसा करने से आप विपरीत परिस्थिति से आसानी से निकल आते हैं।

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