शनि ग्रह की विशेषताएँ

शनि ग्रह को नव ग्रहों में दंडाधिकारी भी कहा जाता है

↔️शनि ग्रह को नव ग्रहों में दंडाधिकारी भी कहा जाता है और कर्म फल का दाता भी यही ग्रह है। यह तुला राशि में उच्च अवस्था में होता है और मेष इनकी नीच राशि है। इनका दो राशियों पर मुख्य रूप से आधिपत्य होता है जो कि मकर और कुंभ हैं। शनि की साढ़ेसाती अपने आप में काफी महत्वपूर्ण होती है क्योंकि यह जीवन में काफी अधिक प्रभाव दिखाती है। इसके अलावा शनि की ढैया, पनौती और कंटक शनि भी विभिन्न रूपों में जीवन को प्रभावित करता है।

↔️आमतौर पर शनि को क्रूर ग्रह माना जाता है और लोग इनसे काफी भयभीत होते हैं जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल भिन्न है। शनि यदि अच्छी स्थिति में हो तो व्यक्ति को रंक से राजा बना देता है। यह व्यक्ति को किए हुए कर्मों के अनुसार ही फल देता है, इसलिए व्यक्ति अपने कर्मों पर ध्यान ना देते हुए परेशान रहते हैं।

↔️शनि के नक्षत्र पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद हैं तथा यह पश्चिम दिशा पर अपना आधिपत्य रखता है।। शनि से संबंधित कार्यों में ऑटोमोबाइल का व्यापार, लेबर कार्य, इंजीनियरिंग, धातुओं से संबंधित व्यापार और मेहनत करने वाले सभी काम तथा सेवा क्षेत्र आता है। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार का लोहा, चमड़ा, काली दाल, काली वस्तुएँ, कोयला, प्राचीन वस्तुओं, आदि पर शनि का प्रभाव होता है।

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↔️धार्मिक मतानुसार शनि देव को सूर्य देव और संध्या का पुत्र माना जाता है और इन्हें नव ग्रह मंडल में विशेष दर्जा प्राप्त है क्योंकि व्यक्ति ये को उनके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं, इसलिए अच्छे लोगों को अच्छा फल और बुरे लोगों को बुरा फल प्रदान करना शनि की ख़ासियत है।

✨शनि के अनुकूल होने पर

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि बलशाली स्थिति में हैं और मजबूत हैं तो ऐसा शनि व्यक्ति को कर्मशील और न्याय प्रिय बनाता है। ऐसे व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में जबरदस्त सफलता मिलती है और व्यक्ति के अंदर धैर्य की भी कोई कमी नहीं होती। उसके जीवन में स्थिरता होती है और जैसे-जैसे उसकी उम्र बढ़ती जाती है, वैसे ही उसके जीवन में समृद्धि और समझ विकसित होती जाती है तथा समाज में लोकप्रिय होने लगता है। केंद्र भाव में उच्च राशि तुला या स्वराशि मकर और कुंभ में शनि स्थित हो तो शश नामक पंच महापुरुष योग बनाता है, जो व्यक्ति को अतुलनीय ऊँचाइयों पर पहुंचा देता है। शनि के शुभ होने पर व्यक्ति रंक से राजा बन जाता है। उसकी तरक्की धीरे-धीरे होती है लेकिन पक्की होती है।

✨शनि के प्रतिकूल होने पर

यदि आपकी कुंडली में शनि पीड़ित है अथवा थोड़ा कमजोर अवस्था में है तो ऐसा शनि अनेक प्रकार की दुर्घटनाओं और कारावास जैसी स्थितियों का निर्माण करता है। व्यक्ति को दुख मिलता है और उसकी मेहनत बढ़ जाती है तथा मेहनत के अनुपात में सफलता नहीं मिल पाती। ऐसा व्यक्ति जीवन में आशा से दूर होने लगता है और निराशावादी नज़रिया अपना लेता है, जिससे बाद में जाकर उसे परेशानियां होती हैं। उसके कार्य में अड़चनें आती हैं और यदि स्थिति ज्यादा प्रतिकूल हो तो व्यक्ति को अस्थमा, चर्म रोग, पैरालिसिस, जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

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✨शनिके तीन चमत्कारी मंत्र

किसी भी ग्रह का मंत्र जाप करने से उसके अनुकूल प्रभावों में बढ़ोतरी होती है, इसलिए आज हम आपको ऐसे तीन मंत्र बता रहे हैं, जिनका जाप करने से आप शनिदेव की विशेष अनुकंपा प्राप्त कर सकते हैं और जीवन में आ रही समस्याओं को समाप्त कर सकते हैं। ये तीन शनि मन्त्र इस प्रकार हैं:

✨शनि का वैदिक मंत्र

ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शं योरभि स्त्रवन्तु न:।।

✨शनि का तांत्रिक मंत्र

ॐ शं शनैश्चराय नमः।।

✨शनि का बीज मंत्र

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।

🙏🙏उपरोक्त तीनों में से किसी भी शनि मंत्र का जाप आप कम से कम 108 की संख्या में प्रतिदिन करें! यह मंत्र आपको रुद्राक्ष की माला से जपने चाहियें और शनिवार से प्रारंभ करना चाहिए। मंत्र जाप संपूर्ण होने के बाद शनि देव से प्रार्थना करनी चाहिए कि वे आपके जीवन की समस्याओं का अंत करें और आप पर अपनी कृपा दृष्टि डालें। ये चमत्कारिक मंत्र शनि देव को प्रसन्न करने के सबसे सटीक उपाय माने गए हैं।।

🙏🙏 ऊपर लिखे हुए लेख में किसी प्रकार की त्रुटि के लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं ।। आपका जीवन मंगलमय हो ।। हम आपके सुख समृद्धि की कामना करते हैं ।।

Source: Astrology Group

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